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प्रतिलिपि
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जलवायु परिवर्तन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, 18 का भाग 9

विवरण
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इस एपिसोड में, सुप्रीम मास्टर चिंग हाई वीगन आहार और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में दर्शकों के सवालों का जवाब देती हैं। फिर, सभी जीवन की पवित्रता पर अगली पैनल चर्चा पेश की जाती है।

(हमारे पास एक और प्रश्न है जो हमारी कनाडाई साथी, फ्लोरेंस एटिएन से आया है।) स्वागत।

(नमस्कार, मास्टर।) मैं फ्लोरेंस एटिएन हूँ। मैं एक भाषाविज्ञानी हूं और यहां आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। और मैं आपको हमें एकमात्र मुख्य भाषा - प्रेम की भाषा सिखाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहती हूँ। (हाँ।) (मेरा सवाल आपसे है।) जलवायु परिवर्तन और विश्व भुखमरी में बड़ा बदलाव लाने के लिए अमेरिकी जनता का कितना प्रतिशत आवश्यक होगा?

Master: अच्छा, अच्छा सवाल, महोदया। अच्छा प्रश्न। मुझे यकीन है कि इस सवाल के बारे में सोचने के लिए आप काफी चिंतित रहे होंगे। मेरे सभी अनुमानों, अंतर्दृष्टि और विनम्र राय के आधार पर, यदि हम अमेरिका में वैश्विक तापमान वृद्धि को रोकने में वास्तव में कोई ठोस योगदान देना चाहते हैं, तो अमेरिकी आबादी का 70% हिस्सा वीगन होना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि वे होंगे। यह चलन बढ़ रहा है, महोदया। यह चलन बढ़ रहा है। मुझे उम्मीद है कि हम बहुत जल्द 70% तक पहुंच जाएंगे। और जितने ज्यादा लोग वीगन बनेंगे, उतना ही ज्यादा समय हमें ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए मिलेगा। और हां, वीगन बनने से दुनिया भर में भूखमरी भी खत्म हो जाएगी, यह तो आप जानते ही हैं।

MC:Jane Velez-Mitchell: सुप्रीम मास्टर, मुझे लगता है कि इसी के साथ इस पैनल के लिए हमारे प्रश्न समाप्त होते हैं। सुप्रीम मास्टर चिंग हाई, आपकी बुद्धिमत्ता के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। हमारे अद्भुत पैनल के सदस्यों को उनकी बुद्धिमत्ता के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

हम आपके लिए आध्यात्मिकता पर एक और असाधारण पैनल लेकर आए हैं - क्यों समस्त जीवन पवित्र है।

Master: धन्यवाद, जेन। धन्यवाद। यह सिर्फ बुद्धिमत्ता की बात नहीं है, जेन। यह जानकारी है। जानकारी जो आजकल इंटरनेट पर उपलब्ध है।

MC:Jane Velez-Mitchell: मैं जेन वेलेज़-मिटचेल हूं, जो एक खोजी पत्रकार और गर्वित वीगन हूं, और हम इस बारे में बात कर रहे हैं कि दुनिया को कैसे बचाया जाए। दुनिया भर के लोग इस प्रसारण को देख रहे हैं, न केवल इंटरनेट पर, बल्कि सैटेलाइट टेलीविजन पर भी, दुनिया भर में 14 से अधिक सैटेलाइट इसे डाउनलोड कर रहे हैं। तो, आप सभी दर्शकगण और आप सभी घर बैठे, हम आज दुनिया को बदल रहे हैं। अब तक हमारी शानदार बातचीत हुई है और यह जारी रहेगी। अब हमारे पास आध्यात्मिकता और आहार पर एक पैनल चर्चा होगी। और ये दोनों चीजें आपस में बहुत, बहुत जुड़ी हुई हैं। अगर आप आध्यात्मिकता की बात कर रहे हैं, लेकिन आप फास्ट फूड और बर्गर खा रहे हैं, तो कुछ गड़बड़ है। हम इस बारे में बात करने जा रहे हैं कि समस्त जीवन पवित्र क्यों है और हमेशा की तरह हमें अपने साथ सुप्रीम मास्टर चिंग हाई को पाकर बेहद खुशी हो रही है, जो आज इन सभी बातों को एक साथ ला रही हैं, जो इस संदेश को दुनिया भर में फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं। एक बार फिर धन्यवाद, सुप्रीम मास्टर। (धन्यवाद, प्रिय। धन्यवाद, मेरे प्यार।)

हमारे पास एक बेहतरीन पैनल भी है। और मुझे लियोनेल फ्रीडबर्ग से व्यक्तिगत रूप से मिलने की बेहद खुशी है, जो एमी पुरस्कार विजेता निर्माता और निर्देशक हैं, जिन्होंने "ए सेक्रेड ड्यूटी" नामक एक अद्भुत वृत्तचित्र बनाया है, जो पशु कृषि की भयावहता के बारे में है। और सच में, "भयानक" ही सही शब्द है। अगर आप में से किसी ने भी यह डॉक्युमेंट्री देखी है, तो यह वास्तव में इस उद्योग के जहरीले रहस्यों और काले सच को उजागर करती है।

मुझे इस बात की भी बेहद खुशी है कि मेरे एक प्रिय प्रशंसक, डॉ. इलियट कैट्ज़, "इन डिफेंस ऑफ एनिमल्स" के अध्यक्ष हैं, जो जानवरों के लिए बहुत कुछ करते हैं और पशु समुदाय से जुड़ी कई समस्याओं के बारे में जागरूकता फैलाते हैं - चाहे वह फैक्ट्री फार्मिंग हो, या जानवरों पर परीक्षण - हर क्षेत्र में। और अंत में, एक बार फिर, हमारे साथ डॉ. विल टटल हैं, जो अद्भुत पुस्तक "द वर्ल्ड पीस डाइट: ईटिंग फॉर स्पिरिचुअल हेल्थ एंड सोशल हार्मनी" के बेस्टसेलिंग लेखक हैं। और जैसा कि मैंने बताया, सुप्रीम मास्टर चिंग हाई एक अंतरराष्ट्रीय वेब और सैटेलाइट हुक-अप पर हमारे साथ जुड़ रहे हैं। और हमें इस पैनल चर्चा में सुप्रीम मास्टर की भागीदारी से बेहद खुशी हो रही है।

(धन्यवाद, जेन। लियोनेल, आपकी राय में, आज के इस गंभीर संकट से उबरने में धार्मिक संगठनों की क्या भूमिका है?)

Lionel: खैर, स्पष्ट रूप से वैश्विक तापवृद्धि और जलवायु परिवर्तन के इस पूरे मामले के कई पहलू और आयामो हैं।

और मुझे लगता है कि सबसे ज्यादा नजरअंदाज किए जाने वाले मुद्दों में से एक, खासकर मीडिया में और जिस मुख्यधारा के मीडिया की हम बात कर रहे हैं, वह है नैतिकता और सदाचार का मुद्दा, खुद से यह सवाल पूछना कि, "क्या हम अपनी दुनिया, अपने ग्रह, उन प्रजातियों के साथ जो कुछ भी कर रहे हैं, उसमें नैतिक रूप से कुछ गलत है जिनके साथ हम यह ग्रह साँझा करते हैं?" असल में बात यहीं आकर रुकती है। और सच्चाई यह है कि, जब आप राजनीतिक तर्कों, वैज्ञानिक प्रश्नों, इंजीनियरिंग पहलुओं आदि से परे जाते हैं, तो वास्तव में आपको ग्लोबल वार्मिंग के गहन नैतिक पहलू में उतरना होगा यदि हम लोगों के दिलों को छूना चाहते हैं और उन्हें इस पर सबसे गहरे स्तर पर विचार करने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। नैतिकता ही वह कारक है जो हमारे बहुत से कार्यों को प्रेरित करती है, और हमारा नैतिक ताना-बाना ही हमारे बहुत से निर्णय लेने का आधार है।

अगर हम इस मामले में सही फैसले नहीं लेते हैं, तो क्या होने वाला है? हो सकता है कि हमें इंजन से अधिक माइलेज मिल जाए, लेकिन अगर हम ध्रुवीय भालुओं को विलुप्त होने दें, तो इसका क्या फायदा? मुझे लगता है कि हम अपने मिशन में असफल रहे हैं। और अंत में हमारे सामने एक नैतिक रूप से खोखली और कमजोर दुनिया ही बचेगी। और मुझे नहीं लगता कि हममें से कोई भी वास्तव में ऐसा चाहता है। इसलिए, मेरा मानना ​​है कि इन मुद्दों को सुलझाने में धर्म की बहुत बड़ी भूमिका होती है। मैंने "ए सेक्रेड ड्यूटी" नामक एक फिल्म बनाई, जिसका निर्माण नॉर्थ अमेरिका के ज्यूईश वैजीटैरियन नामक एक संगठन के लिए किया गया था - उन्होंने फिल्म का खर्च वहन किया - संक्षेप में जीनवीए। और इसमें उन सभी पहलुओं पर चर्चा की गई है जिन पर हम आज यहां चर्चा कर रहे हैं: कृषि पक्ष से, वैज्ञानिक पक्ष से, ग्लोबल वार्मिंग से, कार्बन डाइऑक्साइड से, आप जो भी नाम लें, सब कुछ। लेकिन फिल्म के अंत में, हमने स्पष्ट शब्दों में इस बात पर ध्यान दिया कि असल में मुद्दा यह है, "हम उन प्राणियों के साथ क्या कर रहे हैं जिनके साथ हम इस दुनिया को साँझा करते हैं?"

और हम उनके साथ बहुत ही भयानक बर्ताव कर रहे हैं। और इसे दिखाने में इसने कोई कसर नहीं छोड़ी। और इस वजह से बहुत से लोग फिल्म से दूर हो गए क्योंकि वे इसके बारे में जानना नहीं चाहते थे। वे उस घटनाक्रम से निपटना नहीं चाहते थे। इसलिए डीवीडी की शुरुआत में ही एक मेनू लगाने मैं मजबूर हुआ ताकि लोग चाहें तो उस हिस्से को छोड़ सकें। मैं ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया। क्योंकि लोग कहते हैं, "ओह, ठीक है, मैं इसे बच्चों को नहीं दिखा सकता।" मैं इसे अपनी सास को नहीं दिखा सकती," और सब और भी बातें। लेकिन हमें इस स्तर पर इसके बारे में सोचना शुरू करना होगा। हमें उम्मीद थी कि यह फिल्म, जिसे एक यहूदी संगठन ने बनाया है, लेकिन यह सार्वभौमिक मुद्दों को संबोधित करती है, लोगों को प्रभावित करेगी। इसमें यहूदी मुद्दों को विशेष रूप से संबोधित नहीं किया गया है। इसे एक यहूदी संगठन द्वारा बनाया गया था, लेकिन यह इस बात पर गौर करता है कि बाइबिल को क्या कहना है, बाइबिल की महान पुस्तको को क्या कहना है, मूसा की पांच पुस्तकें। इसमें लोगों को प्रभावित करने के लिए उससे लिए गए पाठ और उद्धरणों को शामिल किया गया था। क्योंकि बहुत से लोग आराधनालयो, मंदिरो, चर्चो, मस्जिदो और अन्य कई धार्मिक स्थलों पर जाते हैं, और यह बात उन्हें प्रभावित करती है।

और इसलिए, फिल्म में एक धार्मिक मुद्दा संलग्न किया गया था, इस उम्मीद में कि हम न केवल बाइबल के दायरे में, बल्कि हर जगह एक बहुत बड़े दर्शक गण तक पहुंचेंगे। और हमारी यही उम्मीद थी कि स्थापित धर्म - चाहे वह ईसाई धर्म हो, इस्लाम हो, बौद्ध धर्म हो, यहूदी धर्म हो, रोसिक्रुशियनवाद हो या कोई और - अंततः एक साथ आएंगे और एक साँझा मंच पर पहुंचेंगे और जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण स्वयं से हमारे संबंध, और उन जानवरों से हमारे संबंध जैसे मुद्दों को संबोधित करना शुरू करेंगे, जिनका हम प्रयोगशालाओं, कारखाने के खेतों और बूचड़खानों में इतनी भयावहता से दुरुपयोग कर रहे हैं। मुझे विस्तार से बताने की जरूरत नहीं है; आप सभी जानते हैं कि क्या चल रहा है।

लेकिन हम धार्मिक समुदाय में पर्याप्त लोगों तक नहीं पहुंच पाए। दुर्भाग्य से, धार्मिक समुदाय इन मुद्दों पर एक साँझा मंच पर चर्चा करने और एक साथ आने में बहुत अनिच्छुक रहा है। और मैं आज भी सोचता रहता हूं कि आखिर यह सब किस बारे में है, इतनी उदासीनता क्यों है। मुझे लगता है कि लगभग सौ वर्षों में, या शायद इससे भी कम समय में, हम इस युग को याद कर पाएंगे और आश्चर्य करेंगे कि हमने अमेज़न वर्षावन को इस तरह नष्ट होने कैसे दिया; हमने अफ्रीका और एशिया के महान वानरों को विलुप्त कैसे होने दीया। हमने प्रवाल भित्तियों को लुप्त होने की अनुमति कैसे दी? क्या हमें पता नहीं था कि क्या हो रहा था? क्या धार्मिक मंच पर उपस्थित लोगों को यह एहसास नहीं हुआ कि क्या हो रहा है और क्या उन्होंने इसके बारे में खुलकर आवाज नहीं उठाई? यह सोचकर ही मुझे डर लगता है कि एक दिन हमारे पोते-पोतीओ हमसे क्या कहेंगे जब वे हमसे कहेंगे, "अच्छा, आपको पता नहीं था?"

लेकिन बेशक, हम जानते हैं। और मुझे लगता है कि यह एक मूलभूत मुद्दा है जिसे धार्मिक समुदाय द्वारा संबोधित किया जाना चाहिए। वे फिलहाल मोर्चा नहीं संभाल रहे हैं और इन मुद्दों पर गौर नहीं करते। और मुझे लगता है कि हमें उस बाधा को तोड़ना होगा। हम सभी जानते हैं कि आजकल क्या हो रहा है। अगर आप हाल ही में कैलिफोर्निया के चिनो में हुए मांस की वापसी की घटना को देखें, जहां स्कूल सिस्टम और सुपरमार्केट से 143 मिलियन पाउंड मांस वापस मंगाया गया था, केवल इसलिए कि घायल गायों (ये वे गायें हैं जो चलने में असमर्थ या लंगड़ी होती हैं) को बूचड़खानों में बेरहमी से प्रताड़ित किया जा रहा था और इसलिए उनके मांस को "दूषित" माना गया था, और इस सारे मांस को वापस मंगवा लिया गया।

तो, ऐसा नहीं है कि हमें पता ही नहीं है कि क्या हो रहा है। हमे पता हैं। और मुझे यह समझ में नहीं आता कि हम उदासीनता की इस बाधा को क्यों नहीं तोड़ पाए हैं। और यह एक ऐसा प्रश्न है जो मैं बाद में सुप्रीम मास्टर से पूछना चाहूंगा। कामना है कि उन्हें इस बारे में कुछ जानकारी हो। ऐसा नहीं है कि हम बेवकूफ हैं या हमें जानकारी नहीं है। हम चंद्रमा पर जाकर वापस आ चुके हैं, और हमारे छोटे रोबोटिक खोजकर्ताओ सौर मंडल के किनारे पर मौजूद हैं।

इसलिए हमारे पास इन नैतिक विकल्पों को चुनने और इन मुद्दों पर सवाल उठाने की बुद्धि है, लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं। इसलिए, इस फिल्म के मेरे सह-निर्माता रिचर्ड श्वार्ट्ज, जो उत्तरी अमेरिका के ज्यूईश वैजिटैरियन के अध्यक्ष हैं, के प्रति पूरे सम्मान के साथ, मैं आज इस मंच का उपयोग करते हुए सुप्रीम मास्टर टेलीविजन के माध्यम से विश्व भर के धार्मिक समुदाय को एक चुनौती देना चाहता हूं कि वे एक साथ आएं और इन मुद्दों पर सोचना शुरू करें और इनके बारे में थोड़ा और मुखर हों, थोड़ा और मुखर हों। इसे धार्मिक चिंतन की मुख्यधारा में शामिल करें।

क्योंकि अगर हमें ग्लोबल वार्मिंग को रोकना है और उन भयावह घटनाओं को रोकना है जो हो रही हैं और हमें बीमार कर रही हैं, तो हमें वास्तव में इसे उस जगह पर लाना होगा जहां बहुत सारे लोग जाते हैं और वह है धार्मिक मंच। और अतः, मैं पूरे सम्मान के साथ आज यह चुनौती प्रस्तुत करता हूँ। और मैं सुप्रीम मास्टर से एक प्रश्न पूछकर अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा: क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे हम इस उदासीनता को दूर कर सकें जो लोगों को इस मुद्दे को अपनाने और शाकाहार (वीगन) आहार में परिवर्तित होने से रोक रही है? जब तथ्य बिल्कुल स्पष्ट हों? अब हम सभी को इसकी सुविधा उपलब्ध है।

Master: जी हाँ, नमस्कार श्रीमान फ्रीडबर्ग, इस सम्मान के लिए धन्यवाद। सबसे पहले तो मैं आपकी इतनी चिंता के लिए धन्यवाद देता हूं, और आप बिल्कुल सही हैं। मुझे लगता है कि धार्मिक लोगों और नेताओं को इस विषय पर खुलकर बोलना चाहिए, उन्हें जनता को उस गंभीर समस्या को समझाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए जिसका हम सामना कर रहे हैं और वैश्विक तापमान वृद्धि को रोकने के समाधान के बारे में बताना चाहिए। लेकिन यह सब रातोंरात इतना आसान नहीं होने वाला है। लेकिन मुझे लगता है कि अभी, हम शायद जनता को वीगन आहार का विकल्प दे सकते हैं।

भले ही धार्मिक नेता इस काम में हमारी मदद न करें, फिर भी हम पूरी कोशिश कर सकते हैं और इंटरनेट, पर्चे, मीडिया, टेलीविजन और लोगों के बीच बातचीत के माध्यम से इस खबर को फैला सकते हैं। हम उन्हें जलवायु परिवर्तन और उनके समाधान के बारे में सभी नवीनतम जानकारी प्रदान कर सकते हैं। और फिलहाल, एकमात्र समाधान - सबसे अच्छा, सबसे तेज़ और सबसे प्रभावी - वीगन आहार है। वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार भी, यही वैश्विक तापक्रम वृद्धि का प्रमुख समाधान है। मैं तो पशु-जन मांसाहार से उत्पन्न नैतिक दायित्वों और कर्मफल की बात भी नहीं कर रही हूँ। लेकिन अगर हम आम जनता को पर्याप्त जानकारी दें, और अगर वे दुनिया को बचाने के लिए पशु -जन मांस का त्याग करने की परवाह करें, तो उनके दिल इतने बड़े हो जाएंगे कि वे अन्य प्रजातियों के प्रति अधिक दयालु हो सकें। और फिर वे धीरे-धीरे, स्वाभाविक रूप से भी, अपने उदार जीवन स्तर के कारण यह समझ जाएंगे कि दूसरों से प्रेम करना स्वयं से प्रेम करना है। जब ग्रह की अधिकांश या पूरी आबादी वीगन आहार की ओर रुख कर लेगी, तो यह एक अधिक स्वतः मानसिक दृष्टिकोण बन जाएगा। अब, जब हमने दुनिया को बचा लिया है, हमें उन्हें पशु जनों के प्रति करुणा के बारे में गहन स्तर पर समझने में मदद करने के लिए अधिक समय मिलेगा। धन्यवाद महोदय। (धन्यवाद।) (धन्यवाद, हमारे साथ साँझा करने के लिए, सुप्रीम मास्टर चिंग हाई और श्री फ्रीडबर्ग को।)

Photo Caption: "दिव्य के साथ शाश्वत मित्रता सुरक्षा, खुशी, और सच्चा जीवन लाती है।"

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